आसमान से गिरती आग और कान फाड़ देने वाले धमाके। यूक्रेन के शहरों के लिए यह कोई नई बात नहीं है। लेकिन हालिया हफ्तों में एक बदलाव महसूस किया जा रहा है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि उनकी सेना ने ईरानी मूल के 'शाहेद' ड्रोन्स के खिलाफ एक मजबूत दीवार खड़ी कर दी है। युद्ध विराम की चर्चाओं और मोर्चे पर जारी भारी गोलाबारी के बीच यह दावा सिर्फ सैन्य सफलता नहीं बल्कि एक मनोवैज्ञानिक जीत भी है।
रूस लगातार इन सस्ते और घातक ड्रोन्स का इस्तेमाल यूक्रेन के बिजली घरों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने के लिए कर रहा है। जेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेनी एयर डिफेंस ने इन 'कामिकेज' ड्रोन्स को मार गिराने में महारत हासिल कर ली है। यह कामयाबी ऐसे समय में आई है जब दुनिया शांति वार्ताओं की सुगबुगाहट देख रही है। लेकिन क्या वाकई इन ड्रोन्स का खतरा टल गया है? या यह सिर्फ एक अस्थायी राहत है? Read more on a connected topic: this related article.
शाहेद ड्रोन्स का गिरता ग्राफ और यूक्रेन की नई रणनीति
रूस ने जब पहली बार शाहेद-136 ड्रोन्स का इस्तेमाल शुरू किया, तो वे यूक्रेन के लिए सिरदर्द बन गए थे। ये ड्रोन्स धीमे हैं और शोर करते हैं, फिर भी इन्हें पकड़ना मुश्किल था क्योंकि ये बहुत नीचे उड़ान भरते हैं। अब खेल बदल गया है। जेलेंस्की ने स्पष्ट किया है कि मोबाइल फायर ग्रुप्स और पश्चिमी देशों से मिली एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणालियों ने रूस के इस सस्ते हथियार को बेकार साबित करना शुरू कर दिया है।
यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि पिछले कुछ हमलों में सफलता की दर 80% से ऊपर रही है। कई बार तो 100% ड्रोन्स को हवा में ही ढेर कर दिया गया। यह सफलता केवल तकनीक की नहीं है। यह उन सैनिकों के अनुभव की है जिन्होंने रातों की नींद त्याग कर आसमान में इन 'उड़ने वाले मोपेड' को ढूंढना सीखा है। जेलेंस्की का यह दावा रूस को एक सीधा संदेश है कि अब हवाई हमलों से डराने का दौर खत्म हो रहा है। Further reporting by NPR highlights related perspectives on this issue.
युद्ध विराम की आड़ में क्या चल रहा है
युद्ध विराम की खबरें अक्सर हेडलाइंस बनती हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही होती है। जब भी शांति की बात होती है, हमलों की तीव्रता बढ़ जाती है। रूस इन ड्रोन्स का इस्तेमाल यूक्रेन के एयर डिफेंस को थकाने के लिए करता है। एक शाहेद ड्रोन की कीमत कुछ हजार डॉलर होती है, जबकि उसे गिराने वाली मिसाइल लाखों डॉलर की आती है।
जेलेंस्की इस बात को बखूबी समझते हैं। इसलिए उनका जोर अब सिर्फ मिसाइलों पर नहीं, बल्कि 'जैमिंग' और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर पर है। अगर आप बिना महंगी मिसाइल दागे ड्रोन का सिग्नल काट कर उसे जमीन पर गिरा सकते हैं, तो आप यह आर्थिक युद्ध जीत रहे हैं। जेलेंस्की का ताजा बयान इसी रणनीति की पुष्टि करता है। वे दुनिया को बता रहे हैं कि यूक्रेन अब केवल बचाव नहीं कर रहा, बल्कि रूस के सबसे किफायती हथियार को भी नाकाम कर रहा है।
पश्चिमी देशों की मदद और घरेलू उत्पादन का मेल
यूक्रेन ने पिछले एक साल में अपने खुद के ड्रोन प्रोग्राम को भी रफ्तार दी है। जेलेंस्की ने कई बार कहा है कि दुश्मन को उसी की भाषा में जवाब देना जरूरी है। जहां एक तरफ 'शाहेद' को नष्ट किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन अपने लंबी दूरी के ड्रोन्स से रूसी तेल डिपो और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।
यह संतुलन ही युद्ध की दिशा तय कर रहा है। पश्चिमी देशों ने 'पैट्रियट' और 'आइरिस-टी' (IRIS-T) जैसी प्रणालियां देकर यूक्रेन के आसमान को सुरक्षा दी है। लेकिन जेलेंस्की जानते हैं कि विदेशी मदद पर हमेशा निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसलिए उन्होंने स्थानीय इंजीनियरों को ड्रोन इंटरसेप्टर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
रूस के लिए ये दावे कितने बड़े झटके हैं
रूस के लिए शाहेद ड्रोन्स उसकी सैन्य ताकत का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। अगर यूक्रेन इन्हें बड़े पैमाने पर नष्ट करने में सफल रहता है, तो रूस के पास विकल्प कम हो जाएंगे। उसे फिर से महंगी क्रूज मिसाइलों की ओर मुड़ना होगा, जिनका स्टॉक सीमित है।
जेलेंस्की का दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूक्रेनी नागरिकों के मनोबल को बढ़ाता है। कड़ाके की ठंड और बार-बार होते ब्लैकआउट के बीच यह खबर राहत देती है कि कम से कम आसमान से आने वाली मौत को रोका जा रहा है। रूस ने इन ड्रोन्स के जरिए यूक्रेन के हौसलों को तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन लगता है कि पासा पलट रहा है।
क्या शाहेद का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है
ईमानदारी से कहूं तो नहीं। युद्ध में कभी भी 'पूरी तरह' जैसा कुछ नहीं होता। रूस अब इन ड्रोन्स को और आधुनिक बना रहा है। हाल ही में काली पेंट वाले ड्रोन्स देखे गए जिन्हें रात में ढूंढना और भी मुश्किल होता है। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि अब इनमें छोटे जेट इंजन लगाने की कोशिश भी हो रही है ताकि इनकी रफ्तार बढ़ सके।
जेलेंस्की ने अपनी घोषणा में यह भी संकेत दिया कि भले ही हमने हालिया हमलों को नाकाम किया है, लेकिन सतर्कता कम नहीं की जा सकती। यह एक निरंतर चलने वाली दौड़ है। एक तरफ हमलावर नई तकनीक ला रहा है, तो दूसरी तरफ रक्षक उसे काटने का तरीका ढूंढ रहा है।
आगे की राह और सुरक्षा के उपाय
यूक्रेन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने एयर डिफेंस को पूरे देश में फैलाना है। अभी मुख्य ध्यान कीव और अन्य बड़े शहरों पर है। छोटे शहर और गांव अब भी इन ड्रोन्स के लिए आसान लक्ष्य बने हुए हैं। जेलेंस्की का लक्ष्य हर यूक्रेनी नागरिक को एक 'सुरक्षित आसमान' देना है।
अगर आप इस स्थिति को करीब से देख रहे हैं, तो कुछ चीजें स्पष्ट हैं। हवाई अलर्ट का पालन करना अब भी अनिवार्य है। भले ही सेना 90% ड्रोन्स गिरा दे, लेकिन बचा हुआ 10% भी भारी तबाही मचा सकता है। सेना अब आम नागरिकों को भी 'ई-पीपीओ' (ePPO) जैसे ऐप्स इस्तेमाल करने के लिए कह रही है, ताकि ड्रोन्स की लोकेशन की तुरंत जानकारी मिल सके।
जेलेंस्की का यह दावा युद्ध के इस मोड़ पर यूक्रेन की बढ़ती ताकत का प्रतीक है। यह दिखाता है कि तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर दुनिया की बड़ी सैन्य ताकतों को भी चुनौती दी जा सकती है। युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यूक्रेन ने कम से कम शाहेद ड्रोन्स के आतंक का तोड़ ढूंढ लिया है। अपनी सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करते रहें और एयर रेड सायरन को कभी नजरअंदाज न करें।