मिडिल ईस्ट में शांति समझौते और युद्धविराम सिर्फ बयानों तक सीमित हैं। जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अमेरिका ने जिस सीजफायर को अपनी बड़ी कामयाबी बताया था, वो दक्षिणी लेबनान में बारूद के ढेर के नीचे दब चुका है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने देश की कैबिनेट बैठक के बाद जो आंकड़े साझा किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।
लेबनानी पीएम के मुताबिक 17 अप्रैल से शुरू हुए तथाकथित सीजफायर के बाद से अब तक इजरायल ने लेबनान पर करीब 3,491 हवाई हमले किए हैं। ये आंकड़े साफ करते हैं कि युद्धविराम सिर्फ नाम का है। लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में लगातार बमबारी हो रही है, जिससे कई सीमावर्ती गांव पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं।
आंकड़ों में तबाही की पूरी कहानी
नवाफ सलाम के आधिकारिक दफ्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस तबाही का पूरा ब्योरा दिया। आंकड़ों के अनुसार 17 अप्रैल से 7 जून के बीच इजरायली सेना ने न केवल साढ़े तीन हजार के करीब एयरस्ट्राइक की, बल्कि 407 कंट्रोल्ड डिमोलिशन (नियंत्रित विस्फोट) और छह बड़े रेजिंग ऑपरेशंस को भी अंजाम दिया।
ये डिमोलिशन इतने बड़े पैमाने पर किए गए हैं कि इजरायल से सटे लेबनान के सीमावर्ती इलाकों के कई गांवों का नामोनिशान मिट चुका है। इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने इन इलाकों में जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर इमारतों को गिराने का काम किया है।
इजरायल का अपना तर्क
जब इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे, तो इजरायल का रुख बिल्कुल साफ था। इजरायली प्रशासन और सेना का कहना है कि वे किसी सीजफायर का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। उनका दावा है कि हिजबुल्लाह लगातार इजरायली शहरों और नागरिकों को निशाना बनाकर रॉकेट दाग रहा है।
इजरायल के मुताबिक सीजफायर की शर्तों में यह साफ है कि अगर उनकी सुरक्षा को खतरा होता है, तो उन्हें पलटवार करने का पूरा हक है। यही वजह है कि वे दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों, उनकी सुरंगों और हथियारों के जखीरे को लगातार निशाना बना रहे हैं।
ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी सीधी जंग
लेबनान की यह स्थिति अचानक इतनी नहीं बिगड़ी। इसके पीछे ईरान और इजरायल के बीच हाल ही में शुरू हुई सीधी सैन्य भिड़ंत है। हिजबुल्लाह ने ईरान के समर्थन में उत्तरी इजरायल पर हमले तेज किए, जिसके जवाब में इजरायली वायुसेना ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों (दाहियेह) पर भारी बमबारी की।
मामला यहीं शांत नहीं हुआ। इसके बाद तेहरान ने सीधे इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिससे पूरा इलाका युद्ध की आग में झुलस गया। इस त्रिकोणीय संघर्ष में लेबनान की आम जनता पिस रही है।
एक तिहाई आबादी बेघर, मानवीय संकट गहराया
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस संघर्ष की वजह से देश में अब तक 3,600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इससे भी भयानक बात यह है कि लेबनान की कुल आबादी का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा, यानी 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर हुए हैं।
पीएम नवाफ सलाम ने बताया कि ईरान और इजरायल के बीच हालिया एस्केलेशन की वजह से विस्थापितों की एक नई लहर आई है। लेबनान की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है। ऐसे में लाखों रिफ्यूजियों को शेल्टर, खाना और दवाइयां मुहैया कराना सरकार के बस से बाहर होता जा रहा है।
अमेरिकी मध्यस्थता पर उठते सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी कूटनीति पर भी बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि मिडिल ईस्ट में सीजफायर का मतलब यह नहीं है कि लड़ाई पूरी तरह रुक जाएगी, बल्कि इसका मतलब 'कम तीव्रता के साथ फायरिंग' है। इस व्यावहारिक लेकिन क्रूर बयान से साफ है कि महाशक्तियां भी मान चुकी हैं कि इस इलाके में पूरी तरह शांति बहाल करना फिलहाल नामुमकिन है।
लेबनान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी संप्रभुता को बचाने की है। हिजबुल्लाह ने अमेरिका की मध्यस्थता वाली शांति वार्ताओं को खारिज कर दिया है, जिसे वे सरेंडर मान रहे हैं। जब तक जमीनी स्तर पर दोनों पक्ष हथियारों को पूरी तरह शांत नहीं करते, तब तक कागजों पर दस्तखत होने से लेबनान के आसमान से बरसते बम नहीं रुकने वाले।